Palitana - 5 Chaityavandan In Hindi Full !full!
चैत्यवंदन करने की सामान्य विधि (Chaityavandan Vidhi)
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गिरिराज शत्रुंजय की चढ़ाई के दौरान पाँच मुख्य स्थानों पर चैत्यवंदन किया जाता है:
प्रभु के सम्मुख झुककर तीन बार खमासमण दें। palitana 5 chaityavandan in hindi full
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे" — इस क्षेत्र के दर्शन मात्र से ही दुर्गति का नाश होता है।
रायण हेठे प्रभुजी बैट्ठा, समवसरण नी रीते,प्रथम केवलज्ञान पा म्या, आदिनाथ अणी प्रीते;कोटि देव परिवा रशुं, देशना दे जगनाथ,चरण कमल नी सेवा करतां, मळे अविचल साथ।
अरिहंतों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सब साधुओं को नमस्कार। यह पाँचों नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है और सब मंगलों में यह पहला मंगल है। Can’t copy the link right now
सिद्धगिरीनो ए महिमा, रायण वृक्ष विशेष;पाप तणां पुंज प्रजले, न रहे दुःखनो लेश।भाव धरीने जे वंदे, मनमां धरी आनंद;ते नर पामे शाश्वत, सुख संपत्तिनो कंद। यत्रा विधि (Quick Reference)
विधिपूर्वक चैत्यवंदन कैसे करें? (Method of Chaityavandan)
भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी ने इसी पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया था। उनके सम्मान में यह चौथा वंदन मुख्य मंदिर के सामने वाले छोटे मंदिर में किया जाता है। प्रभु प्रतिमा वंदो
मैं दुर्वासना (बुरी इच्छाओं) का प्रतिक्रमण करता हूँ, सब दोषों का प्रतिक्रमण करता हूँ, पापों का प्रतिक्रमण करता हूँ, और सब प्रकार से प्रतिक्रमण करता हूँ।
यह वंदन मन की शांति और भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
पर्वत की चढ़ाई के दौरान रास्ते में शांतिनाथ भगवान का सुंदर जिनालय आता है, जिसे आमतौर पर 'बाबू का देरासर' भी कहा जाता है। यहाँ द्वितीय चैत्यवंदन होता है।
पालीताणा में चैत्यवंदन करना केवल शब्दों का उच्चारण नहीं है, बल्कि यह भीतर की श्रद्धा को प्रकट करने का माध्यम है। जब भी आप इन पाँच स्थानों पर चैत्यवंदन करें, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
"एह गिरि ऊपर आदिदेव, प्रभु प्रतिमा वंदो; रायण हेठे पादुका, पूजीने आनंदो"।