Ziyarat E Nahiya In Hindi __top__
امام حسینؑ پر سلام (Salutations to Imam Hussain)
'ज़ियारत-ए-नहिया' की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सीधे इमाम महदी (अ.) से संबंधित मानी जाती है。इस ज़ियारत में इमाम महदी (अ.) न केवल इमाम हुसैन (अ.) के दर्द को बयां करते हैं, बल्कि कर्बला की हर उस घटना का अत्यंत सूक्ष्म और मर्मस्पर्शी विवरण देते हैं जो आशूरा के दिन घटित हुई。
ज़ियारत-ए-नाहिया के मुख्य विषय
इस ज़ियारत में सिर्फ़ इमाम हुसैन (अ) ही नहीं, बल्कि कर्बला के अन्य सभी शहीदों जैसे हज़रत अब्बास, हज़रत अली अकबर, हज़रत अली असग़र और वफ़ादार साथियों के नामों का सिलसिलेवार ज़िक्र है और उन पर सलाम भेजा गया है। ziyarat e nahiya in hindi
یوں تو زیارتِ ناحیہ سال کے کسی بھی دن پڑھی جا سکتی ہے، لیکن درج ذیل دنوں میں اس کی تلاوت کی خاص تاکید کی گئی ہے:
इस ज़ियारत की सबसे ख़ास बात इसका भावुक पहलू है। इमाम-ए-ज़माना फ़रमाते हैं:
of Karbala and, in some versions, the names of their killers. 2. Themes and Content हज़रत अली अकबर
इस ज़ियारत की एक विशेष ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। इस्लामी इतिहास के अनुसार, जब तीसरे शिया इमाम, इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) या छठे इमाम, इमाम जाफ़र अल-सादिक (अ.स.) कर्बला पहुंचे, तो उन्होंने अपने दादा इमाम हुसैन (अ.स.) के रौज़े के पास खड़े होकर इस ज़ियारत को पढ़ा।
शेख मशाहदी द्वारा लिखित पुस्तक में इसका विस्तृत वर्णन है।
यह इमाम हुसैन के साथ अपनी वफादारी और ज़ालिमों के खिलाफ खड़े रहने की प्रतिज्ञा को दोहराती है। in some versions
इस ज़ियारत में इमाम हुसैन (अ.स.) की प्यास, उनकी शहादत के बाद घोड़ों द्वारा उनके शरीर पर दौड़ना, और उनके परिवार की बेबसी का दर्दनाक वर्णन है।
इस लेख में हम “ज़ियारत-ए-नाहिया" (Ziyarat e Nahiya) के बारे में विस्तार से जानेंगे, इसे में समझने की कोशिश करेंगे, ताकि आप इसकी अहमियत, फज़ीलत और पढ़ने के तरीके से पूरी तरह वाकिफ हो सकें।
ज़ियारत-ए-नाहिया के प्रमुख पहलू (Key Features)
ज़ियारत की शुरुआत अल्लाह के चुने हुए नबियों, पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स.), और अन्य मासूम इमामों (अ.) को सलाम भेजने से होती है。यह इस बात को रेखांकित करती है कि इमाम हुसैन (अ.) सभी पिछले पैगंबरों के वारिस और उनके द्वारा लाए गए संदेश के रक्षक थे。